लंबे कारावास के बाद POCSO मामले में सुप्रीम कोर्ट से ज़मानत

लंबे कारावास के बाद POCSO मामले में सुप्रीम कोर्ट से ज़मानत

नई दिल्ली | 19 जनवरी 2026

संवैधानिक व्यक्तिगत स्वतंत्रता (Article 21) को पुनः सुदृढ़ करते हुए Supreme Court of India ने एक महत्वपूर्ण आदेश में POCSO मामले के आरोपी को एक वर्ष पाँच माह से अधिक की हिरासत के बाद ज़मानत प्रदान की है। न्यायालय ने स्पष्ट रूप से कहा कि ज़मानत के लिए प्रथम दृष्टया मामला बनता है


मामले का संक्षिप्त विवरण

  • मामले का शीर्षक: सागर पुत्र मोहनभाई भिखाभाई खुमान बनाम राज्य गुजरात एवं अन्य

  • लागू धाराएँ:

    • IPC: 363, 366, 376(2)(n), 506(2)

    • POCSO अधिनियम: धारा 5(l) सहपठित धारा 6


पीठ (Bench)

यह अपील माननीय
Justice B. V. Nagarathna एवं
Justice Ujjal Bhuyan की खंडपीठ द्वारा सुनी व निस्तारित की गई।


न्यायालय की प्रमुख टिप्पणियाँ

  • अभियुक्त व पीड़िता के बीच संबंध सहमति आधारित बताए गए

  • पीड़िता की आयु 18 वर्ष के निकट पाई गई

  • अभियुक्त ने लंबी अवधि की न्यायिक हिरासत भोग ली है

  • 22 गवाह हैं, जबकि मुकदमे की सुनवाई अब तक प्रारंभ नहीं हुई

  • ऐसी स्थिति में निरंतर कारावास न्यायोचित नहीं


सुप्रीम कोर्ट के निर्देश

उच्च न्यायालय द्वारा ज़मानत अस्वीकृति के आदेश को निरस्त करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि:

“अभियुक्त को यथाशीघ्र संबंधित ट्रायल कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत किया जाए तथा ट्रायल कोर्ट द्वारा उपयुक्त शर्तों पर उसे ज़मानत पर रिहा किया जाए।”

साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया कि:

  • अभियुक्त मुकदमे में पूर्ण सहयोग करेगा

  • शर्तों के उल्लंघन पर ज़मानत रद्द की जा सकती है


कानूनी प्रतिनिधित्व

  • अभियुक्त की ओर से:
    श्री महेश ठाकुर, AOR
    डॉ. एंथनी राजू, अधिवक्ता (सुप्रीम कोर्ट) सहित अधिवक्ताओं की टीम

  • राज्य की ओर से:
    सुश्री स्वाति घिलडियाल, AOR एवं सहयोगी अधिवक्ता


इस निर्णय का महत्व

यह आदेश पुनः रेखांकित करता है कि:

  • “ज़मानत नियम है, जेल अपवाद”

  • सहमति से बने किशोर संबंधों में मानवीय व संवेदनशील दृष्टिकोण आवश्यक

  • अनावश्यक लंबी पूर्व-ट्रायल हिरासत Article 21 का उल्लंघन है


निष्कर्ष

यह निर्णय POCSO मामलों में ज़मानत न्यायशास्त्र की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है, जो बाल संरक्षण कानूनों और मौलिक अधिकारों के बीच संतुलन स्थापित करता है।

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