पॉक्सो केस | अपनी बेगुनाही को कैसे साबित करें
पॉक्सो (POCSO) मामलों में आरोप बहुत गंभीर होते हैं, लेकिन कानून यह भी मानता है कि हर आरोपी तब तक निर्दोष है जब तक दोष सिद्ध न हो। सही कानूनी रणनीति से बेगुनाही साबित की जा सकती है।
🔹 1. तुरंत और सक्षम कानूनी सलाह लें
अनुभवी क्रिमिनल/पॉक्सो विशेषज्ञ अधिवक्ता से संपर्क करें।
एफआईआर, चार्जशीट और केस डायरी की बारीकी से जांच कराएं।
🔹 2. मेडिकल और फॉरेंसिक रिपोर्ट की जांच
पीड़िता की MLC रिपोर्ट, उम्र निर्धारण और FSL रिपोर्ट में विरोधाभास खोजें।
चोट के निशान, समय-सीमा और मेडिकल निष्कर्षों का आरोप से मेल बैठता है या नहीं—यह महत्वपूर्ण है।
🔹 3. पीड़िता की उम्र का सही निर्धारण
स्कूल रिकॉर्ड, जन्म प्रमाण पत्र, बोन टेस्ट—इनमें कानूनी कमियाँ अक्सर मिलती हैं।
उम्र 18 से ऊपर सिद्ध होने पर मामला कमजोर पड़ सकता है।
🔹 4. झूठे या प्रेरित आरोप की पहचान
पारिवारिक विवाद, संपत्ति, बदला, प्रेम-संबंध जैसे कारणों से झूठा फंसाया गया हो—तो इसे ठोस साक्ष्यों से दिखाएं।
शिकायत में देरी, बयान बदलना, या गवाहों के बयान में अंतर—सब रिकॉर्ड पर लाएं।
🔹 5. गवाहों और इलेक्ट्रॉनिक सबूतों का उपयोग
CCTV, कॉल डिटेल, लोकेशन, चैट/मैसेज, यात्रा रिकॉर्ड—अलिबाई (Alibi) साबित कर सकते हैं।
स्वतंत्र गवाहों के बयान अहम भूमिका निभाते हैं।
🔹 6. जांच में कानूनी खामियाँ उजागर करें
गिरफ्तारी/जांच प्रक्रिया में कानून का उल्लंघन, नोटिस की कमी, सैंपल हैंडलिंग की त्रुटियाँ—इनसे अभियोजन कमजोर होता है।
🔹 7. डिफॉल्ट बेल और नियमित बेल
समय-सीमा में चार्जशीट न होने पर डिफॉल्ट बेल (CrPC 167(2)) का अधिकार बन सकता है।
साक्ष्यों की कमजोरी पर नियमित/अंतरिम बेल संभव है।
🔹 8. ट्रायल के दौरान सख्त क्रॉस-एग्ज़ामिनेशन
अभियोजन गवाहों की विश्वसनीयता पर प्रभावी जिरह से संदेह पैदा किया जाता है—संशय का लाभ आरोपी को मिलता है।
⚖️ महत्वपूर्ण तथ्य
सबूत का भार अभियोजन (Prosecution) पर होता है।
संदेह का लाभ आरोपी को—यह आपराधिक न्याय का मूल सिद्धांत है।
About Dr. Anthony Raju
Dr. Anthony Raju
Advocate, Supreme Court of India
Leading Expert in POCSO Cases & Human Rights
Dr. Anthony Raju भारत के प्रमुख संवैधानिक और आपराधिक कानून विशेषज्ञों में से एक हैं।
POCSO मामलों में न्यायसंगत ट्रायल, निर्दोषता के सिद्धांत और मानवाधिकारों की रक्षा उनके कार्य का मूल आधार है।
वे यह दृढ़ता से मानते हैं कि “आरोप नहीं, सबूत न्याय तय करते हैं” और प्रत्येक व्यक्ति को निष्पक्ष सुनवाई का संवैधानिक अधिकार प्राप्त है।
Disclaimer:
यह पोस्ट केवल कानूनी जागरूकता और शैक्षणिक उद्देश्य से है।
इसे किसी भी प्रकार की कानूनी सलाह न माना जाए।
प्रत्येक मामला अपने तथ्यों पर निर्भर करता है।
आरोपी को कानून के अनुसार निर्दोष माने जाने का अधिकार है जब तक दोष सिद्ध न हो।
WhatsApp 085888 72001
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